
मध्य प्रदेश के कटनी जिले की खनिज संपदा अब सिर्फ सोने तक सीमित नहीं रही। उमड़ार नदी के किनारे अचानक मिले कोयले के संकेत ने ग्रामीणों और प्रशासन दोनों को सतर्क कर दिया है। यह क्षेत्र पहले ही सोने और अन्य क्रिटिकल मिनरल्स के लिए चर्चा में था, लेकिन अब “काला सोना” भी कटनी की आर्थिक तस्वीर बदल सकता है।
ग्रामीणों ने किया अवैध उत्खनन
बड़वारा तहसील के लोहरवारा ग्राम पंचायत के सलैया केवट क्षेत्र में रेत खदान में खनन के दौरान काले पत्थर जैसी सामग्री मिलने की खबर फैलते ही इलाके में हलचल मच गई। ग्रामीण बोरी, ट्रैक्टर और साइकिल में कोयला ले जाते दिखे। प्रशासन और खनिज विभाग फिलहाल स्थिति पर कड़ी निगरानी कर रहे हैं।
GSI और खनिज विभाग का फील्ड सर्वे
सूचना मिलते ही भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) और खनिज विभाग की टीम मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने 2.5 घंटे तक निरीक्षण किया और विभिन्न स्थानों से नमूने एकत्र किए। प्रारंभिक जांच में कोयले की उपस्थिति के सकारात्मक संकेत मिले हैं, जिनका लैब में ग्रेड और गुणवत्ता परीक्षण किया जाएगा।
उच्च गुणवत्ता के बिटूमिनस कोयले की संभावना
प्रारंभिक निरीक्षण में नदी के कटाव वाले हिस्से में कोयले की सीम (Coal Seam) दिखाई दी। कुछ स्थानों पर 0.5 से 2 फीट तक का एक्सपोजर सामने आया। अधिकारियों का अनुमान है कि यह ए-ग्रेड बिटूमिनस थर्मल कोयला हो सकता है। अगर पुष्टि होती है, तो यह कटनी जिले के लिए महत्वपूर्ण आर्थिक उपलब्धि होगी।

रोजगार और राजस्व की नई राह
यदि विस्तृत सर्वे और ड्रिलिंग के बाद कोयला आर्थिक रूप से खनन योग्य पाया जाता है, तो मध्य प्रदेश सरकार को भारी राजस्व मिलेगा और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के हजारों अवसर पैदा होंगे।
कटनी बन सकता है खनिज हब
कुछ महीने पहले हुए माइनिंग कॉन्क्लेव में जिले में बड़े निवेश के MOU साइन हुए थे। सोना और क्रिटिकल मिनरल्स के बाद अब कोयले के संकेत मिलने से कटनी का खनिज भविष्य और मजबूत हुआ है। सभी की निगाहें अब सर्वे रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो तय करेगी कि क्या कटनी की धरती वास्तव में कोयले का खजाना छिपाए हुए है।
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